अहंकार की आंधी आई
सत्ता पर बरबादी छाई
सत्कर्मों से पुण्य बटोरे, इतिहासों से निर्णय जोड़े
निपट लिया प्राचीन घाव से, किन्तु वही अपने स्वभाव से
फिसल गिरोगे गहरी खाई
मद में चूर हुए जो पत्थर ,दर्द हुआ जिनको कटने पर
वही सड़क की शोभा गढ़ते,शिल्पी जिनपर हाथ न धरते
राजमहल के समय कहीं अब
सड़क न गह ले ये चतुराई
कितने ही अच्छे मुद्दों से,जनमानस को बहला लोगे
लेकिन प्यासे को पानी से ,अंत समय में भटका दोगे
जब भी नीयत खोटी होगी , तब प्रतिभाएं छोटी होंगी
प्रतिभाएं छाएंगी तब जब, हर बच्चे संग रोटी होगी
उपलब्धियां विफल होंगी यदि
व्यर्थ गई जन की तरुणाई
अहंकार की आंधी आई ...सत्ता पर बरबादी छाई
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