Tuesday, September 15, 2020

राम

 शौर्य के प्रकर्ष, नीति धारी, चेतना के गीत

विनय के प्रतीक, दशरथ के ललाम हैं

हिय नवनीत,कार्य के पुनीत ,स्वाभिमानी

भेदभाव भेदी जगदीश को प्रणाम है

             जन रक्षा साधने को, वैभव विरागने को

             सब सुख त्यागने को श्रेय तेरो नाम है

             निज मन मारकर ,जन जन तारकर

             जीवन सिखाने वाले मेरे प्रभु राम हैं

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