Tuesday, September 15, 2020

सिसकियां पूछती है

 मन का भ्रम कबतक पलता रहेगा?

लालसा का खेल क्या चलता रहेगा!

संबंध विश्वासों पर या छलों से ?

छल गैरों से नहीं ,अपनों से!

        डोर जोड़ने का ये तरीका

        छल अभिमान के साथ ,ये सलीका?

        बस क्या अब भाव से न बंधोगे?

        क्या जीवन में सामना न करोगे?

        क्या इति श्री के लिए श्री गणेश था?

      यदि नहीं तो इतना ज़हर उगलकर क्या पाओगे।

      क्या अब मुंह न दिखाओगे?

 

रोज़ सिसकियां पूछती है रिश्तों से...

       तुम से....... प्रेम से।

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