मन का भ्रम कबतक पलता रहेगा?
लालसा का खेल क्या चलता रहेगा!
संबंध विश्वासों पर या छलों से ?
छल गैरों से नहीं ,अपनों से!
डोर जोड़ने का ये तरीका
छल अभिमान के साथ ,ये सलीका?
बस क्या अब भाव से न बंधोगे?
क्या जीवन में सामना न करोगे?
क्या इति श्री के लिए श्री गणेश था?
यदि नहीं तो इतना ज़हर उगलकर क्या पाओगे।
क्या अब मुंह न दिखाओगे?
रोज़ सिसकियां पूछती है रिश्तों से...
तुम से....... प्रेम से।
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