घाट घाट राधा संग बाट नापने वाले
तान बांसुरी से रिझाते देखे जाते हैं
पनघट से घट को कंकरी मार अल्हड़ से
ताली दे देके खिलखिलाते देखे जाते हैं
गवालों की भूख मिटाने खातिर चोरी से
चोरी चोरी मन को चुराते देखे जाते हैं
वही मनमोहन करुण दशा देख साथी की
फूट फूट अश्रु बहाते देखे जाते हैं
माखन चोरी करके झूठ बोलने वाले
सत्य हेतु धर्म सिखाते देखे जाते हैं
नटखट लीलाएं करने वाले मायापति
ब्रह्मज्ञान पाठ पढ़ाते देखे जाते हैं
देह अभिमान को विराग्ने का ज्ञान देने
गोपिन का चीर चुराते देखे जाते हैं
भक्तों की लाज के बचैया श्री वासुदेव
अंचल से चीर बढ़ाते देखे जाते हैं
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