दौर ए मसरूफियत में लोगों को
चंद लम्हे ख़रीद लेने दो
कोई ले रामनामी और कोई
चाहे लेना कमीज़ लेने दो
धर्म और मज़हबी दुकां वाले
लेना चाहें तमीज़ लेने दो
फिर भी जाए न जो फितरत तो फिर
रब को ऐसे मरीज़ लेने दो
' वीर ' अल्फ़ाज़ से जो बिछड़े हैं
सबको अपने अजीज़ लेने दो
पाओगे क्या खटास लेकर तुम
सबको व्यंजन लज़ीज़ लेने दो
चंद लम्हे ख़रीद लेने दो
चंद लम्हे ख़रीद लेने दो
कोई ले रामनामी और कोई
चाहे लेना कमीज़ लेने दो
धर्म और मज़हबी दुकां वाले
लेना चाहें तमीज़ लेने दो
फिर भी जाए न जो फितरत तो फिर
रब को ऐसे मरीज़ लेने दो
' वीर ' अल्फ़ाज़ से जो बिछड़े हैं
सबको अपने अजीज़ लेने दो
पाओगे क्या खटास लेकर तुम
सबको व्यंजन लज़ीज़ लेने दो
चंद लम्हे ख़रीद लेने दो
बेहद खूबसूरत लिखा है.
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