Thursday, November 7, 2019

चंद्रयान२

नहीं अमंगल  यह, हे मंगलयान विजेता!
पग धरती पर मन से रख दो नीर बह चले
चन्द्र तलक जाने की इच्छा पूरी होगी
पहचानो निज को , क्यों दृग से पीर बह चले?
              संप्रेषण टूटा है तो क्या, अन्वेषण है।
              बिन संघर्षों हर्ष न ऊंचा मिल पाएगा
              संघे शक्ति और वैज्ञानिक युक्ति गुथकर
             करो वापसी विश्वगुरु फिर विश्व कह चले
      पग धरती पर मन से रख दो नीर बह चले
 
        कुछ न खोया,नहीं अमंगल,विश्व विजेता!

     

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