जीवन की उलझी डोरी हो,
रेखा भविष्य की कोरी हो
डगमग विश्वास लगे मन का ,
इच्छाओं का विलसित तन हो
तब मात पिता की आशा को
अविचल गति से फलते जाना
बाधाएं आएं आने दो ,
कर एक लक्ष्य चलते जाना
रेखा भविष्य की कोरी हो
डगमग विश्वास लगे मन का ,
इच्छाओं का विलसित तन हो
तब मात पिता की आशा को
अविचल गति से फलते जाना
बाधाएं आएं आने दो ,
कर एक लक्ष्य चलते जाना
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