किन आखों से रोएं इनका मोल कौन करेगा
खुदगर्ज़ी के हाथों,तिरस्कार के हृदयों से गुहार लगाऊं?
स्वार्थपरक लोगों से जाकर आशा के अंबार लगाऊं?
जीवन परीक्षक है, निराशों की शुभचिंतक नहीं ,
तो समाधान?
गुहार ले जाना है विधाता की ओर जाऊं
झूठ से लड़ जाऊं कपट को नाच नचाऊं
हरि बिन "वीरेश" को अनमोल कौन करेगा
किन आखों से रोएं इनका मोल कौन करेगा
खुदगर्ज़ी के हाथों,तिरस्कार के हृदयों से गुहार लगाऊं?
स्वार्थपरक लोगों से जाकर आशा के अंबार लगाऊं?
जीवन परीक्षक है, निराशों की शुभचिंतक नहीं ,
तो समाधान?
गुहार ले जाना है विधाता की ओर जाऊं
झूठ से लड़ जाऊं कपट को नाच नचाऊं
हरि बिन "वीरेश" को अनमोल कौन करेगा
किन आखों से रोएं इनका मोल कौन करेगा
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