हे धरतीपुत्र कलाम,है तुझको मेरा सलाम
जबतक चलती थी सांस कभी न तूने लिया विराम
है तुझको मेरा सलाम
विछिन्न हुए हृदयों में तुम स्फूर्ति मार्ग जगाते थे
गिरकर उठना उठकर चलना बस ये ही तो सिखलाते थे
विज्ञान विभूति बन जाने का था तेरा पैग़ाम
है तुझको मेरा सलाम......
थे सम्मानी परहितकारी भारत के लिए समर्पित थे
जितने भी आविष्कार किए सब भारत को ही अर्पित थे
थी यही आस कि युवा करें स्वर्णिम अपना भी नाम
है तुझको मेरा सलाम........
कर्तव्यनिष्ठता की परिपाटी तुमने और बढाई थी
सपनों के भारत को लाने में तुमने जान लगाई थी
विद्वानों की संगति में ही बीती सुबह और शाम
हे धरतीपुत्र कलाम, है तुझको मेरा सलाम
है तुझको मेरा सलाम।
जबतक चलती थी सांस कभी न तूने लिया विराम
है तुझको मेरा सलाम
विछिन्न हुए हृदयों में तुम स्फूर्ति मार्ग जगाते थे
गिरकर उठना उठकर चलना बस ये ही तो सिखलाते थे
विज्ञान विभूति बन जाने का था तेरा पैग़ाम
है तुझको मेरा सलाम......
थे सम्मानी परहितकारी भारत के लिए समर्पित थे
जितने भी आविष्कार किए सब भारत को ही अर्पित थे
थी यही आस कि युवा करें स्वर्णिम अपना भी नाम
है तुझको मेरा सलाम........
कर्तव्यनिष्ठता की परिपाटी तुमने और बढाई थी
सपनों के भारत को लाने में तुमने जान लगाई थी
विद्वानों की संगति में ही बीती सुबह और शाम
हे धरतीपुत्र कलाम, है तुझको मेरा सलाम
है तुझको मेरा सलाम।
No comments:
Post a Comment