दिशाओं की गर्जना और प्रकृति की मेघ रूपी सर्जना ..
ताल से ताल मिला लो ,शुष्क को ताल बना दो
सावन का बहाना भी है अपनी उत्कंठाओं को हिलोरो, और अपने शारीरिक सौष्ठव को पिपासु और मनमोहकता के मतवालों की मुस्कान के लिए बरसने पर लुटा दो।
अभिवादन है तुम्हारा हरियाली की आकांक्षाओं की ओर से....
ताल से ताल मिला लो ,शुष्क को ताल बना दो
सावन का बहाना भी है अपनी उत्कंठाओं को हिलोरो, और अपने शारीरिक सौष्ठव को पिपासु और मनमोहकता के मतवालों की मुस्कान के लिए बरसने पर लुटा दो।
अभिवादन है तुम्हारा हरियाली की आकांक्षाओं की ओर से....
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