तुम मिले तो क्या मिले मिले नहीं जो तब तलक
छोड़ जब चले पलट थी धार संग बही पलक
आंख देखी आस थी कि लड़ पड़ेगी आंख से
आंख जब नहीं लड़ी तो देखने लगी फ़लक
छोड़ जब चले पलट थी धार संग बही पलक
आंख देखी आस थी कि लड़ पड़ेगी आंख से
आंख जब नहीं लड़ी तो देखने लगी फ़लक
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