हे आदिदेव भोले शंकर बलिहारी तेरी भक्ति में
तू गुणागार तू शक्ति सार ,तू परिपालक तू ही संहार
तू तीक्ष्ण नयन तू विषराेधी ,अतिशय भोला असीम क्रोधी
तू त्रिदृग काल गंगा है भाल, तेरा अम्बर है व्याघ्र छाल
त्रिविध तापहर तू विशाल ,ग्रीवा प्रदेश अति विकट व्याल
मृत शय्या से हो खड़ा जीव जिस नीलकंठ की शक्ति में
हे आदिदेव !हे गंगाधर! ,बलिहारी तेरी भक्ति में
हे चंद्रभाल तू प्रलयंकर, शिव मोक्षमार्ग शिव आरतिहर
हे चंडीपति त्रैलोक्यस्वामि, है झंकृत तुझसे अवनि शिखर
दैदीप्यरूप तू भूतभूप ,शुभ धौलवर्ण नटराज अमर
आमरण अजन्मा लटधारी, सुखकारी रुद्रा त्रिपुरारी
व्याख्यान असंभव तेरा है सब वेदों की अभिव्यक्ति में
हे विषपायी ,सतीश ,शेखर! बलिहारी तेरी भक्ति में
बलिहारी तेरी भक्ति में
तू गुणागार तू शक्ति सार ,तू परिपालक तू ही संहार
तू तीक्ष्ण नयन तू विषराेधी ,अतिशय भोला असीम क्रोधी
तू त्रिदृग काल गंगा है भाल, तेरा अम्बर है व्याघ्र छाल
त्रिविध तापहर तू विशाल ,ग्रीवा प्रदेश अति विकट व्याल
मृत शय्या से हो खड़ा जीव जिस नीलकंठ की शक्ति में
हे आदिदेव !हे गंगाधर! ,बलिहारी तेरी भक्ति में
हे चंद्रभाल तू प्रलयंकर, शिव मोक्षमार्ग शिव आरतिहर
हे चंडीपति त्रैलोक्यस्वामि, है झंकृत तुझसे अवनि शिखर
दैदीप्यरूप तू भूतभूप ,शुभ धौलवर्ण नटराज अमर
आमरण अजन्मा लटधारी, सुखकारी रुद्रा त्रिपुरारी
व्याख्यान असंभव तेरा है सब वेदों की अभिव्यक्ति में
हे विषपायी ,सतीश ,शेखर! बलिहारी तेरी भक्ति में
बलिहारी तेरी भक्ति में
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