हे वीणा धारिणी मां ज्ञान का भंडार भर दो, मेंरे मन में प्रसारित भावना को आज स्वर दो
मेरी कंठा में माता शारदे अधिकार कर दो , मैं गाऊं और मेरी वंदना स्वीकार कर दो
मेरी कंठा में माता शारदे अधिकार कर दो , मैं गाऊं और मेरी वंदना स्वीकार कर दो
मैं जन की वेदना का बोल बन जाऊं जगत में
तेरी अभ्यर्थना का तोल बन जाऊं जगत में
मैं सेवकचर तेरा अनमोल बन जाऊं जगत में
चराचर सज्जनों को बुद्धि बल वैभव का वर दो
में गाऊं और मेरी वंदना स्वीकार कर दो।
तेरी अभ्यर्थना का तोल बन जाऊं जगत में
मैं सेवकचर तेरा अनमोल बन जाऊं जगत में
चराचर सज्जनों को बुद्धि बल वैभव का वर दो
में गाऊं और मेरी वंदना स्वीकार कर दो।
धवल हंसो पे माता,ज्ञानियों में वास तेरा
विटप वन वाटिका फल फूल जड़ और घास तेरा
समूची सी धरा तारोंजड़ित आकाश तेरा
इन्हें पोषित करूं मैं मातु मुझ पर हाथ धर दो
में गाऊं और मेरी वंदना स्वीकार कर दो।
विटप वन वाटिका फल फूल जड़ और घास तेरा
समूची सी धरा तारोंजड़ित आकाश तेरा
इन्हें पोषित करूं मैं मातु मुझ पर हाथ धर दो
में गाऊं और मेरी वंदना स्वीकार कर दो।
तुम्ही से लेखनी श्रृंगार का सम्मान है मां
कवि शिक्षक,कला,विज्ञान का प्रतिमान है मां
तुम्ही से देव वाणी और नक्षत्री ज्ञान है मां"
वीर" की लेखनी सुनकर के जन के पाप हर दो
कवि शिक्षक,कला,विज्ञान का प्रतिमान है मां
तुम्ही से देव वाणी और नक्षत्री ज्ञान है मां"
वीर" की लेखनी सुनकर के जन के पाप हर दो
में गाऊँ और मेरी वंदना स्वीकार कर दो।
मेरी कंठा में माता शारदे अधिकार कर दो, में गाऊँ और मेरी वंदना स्वीकार कर दो
- वीरेश पाण्डेय"वीर"
बेहतरीन भाई मेरे
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद प्रिय
DeleteGjb 👌👌👌👌
ReplyDeleteBahut badhiya
ReplyDeleteThnq
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