अगणित विकार में सुखदाई
मन के सुधार में फलदाई
जब कभी व्यर्थ हो गए यत्न
तब इससे तन की द्युति आई
ऐसे पीड़ा से ग्रसित लोग , यौवन वृद्धों सा रहे भोग
जब करके तनसुख पाते है तो कहते हैं नित करें योग
संदेश शक्ति का देता है ,चिर ध्यान शुद्ध कर देता है
नियमित अभ्यास सुझाता है यह चित्त ब्रह्म का नाता है
ऋषियों की रचना से निर्मित यह माध्यम आत्मनियंत्रण का
यह फलीभूत करता तो है ,पर याची नियम समर्पण का
ऊर्जा धारण की कला सीख हम रखें निजकाया निरोग
काटना नहीं यदि जीना है जीवन तो नियमित करें योग
यह आठ बिंदु है समझाता,कोई लघु राह न बतलाता
तम छटकर तेज प्रसारित हो यह उसी राह का निर्माता
यम नियम और आसन करके यह प्राणायाम बताता है
श्वासों से प्राणपुंज भरने की क्रिया रोज दोहराता है
फिर प्रत्याहार ,ध्यान करके ,धारणा समाधि का प्रयोग
अष्टांग क्रिया से नियमबद्ध ,जीवन शैली हो वही योग
तन स्वस्थ रहे मन पुलकित हो,आभा बिखेरते हों निरोग
नित नियमित करते रहें योग, नित नियमित करते रहें योग
मन के सुधार में फलदाई
जब कभी व्यर्थ हो गए यत्न
तब इससे तन की द्युति आई
ऐसे पीड़ा से ग्रसित लोग , यौवन वृद्धों सा रहे भोग
जब करके तनसुख पाते है तो कहते हैं नित करें योग
संदेश शक्ति का देता है ,चिर ध्यान शुद्ध कर देता है
नियमित अभ्यास सुझाता है यह चित्त ब्रह्म का नाता है
ऋषियों की रचना से निर्मित यह माध्यम आत्मनियंत्रण का
यह फलीभूत करता तो है ,पर याची नियम समर्पण का
ऊर्जा धारण की कला सीख हम रखें निजकाया निरोग
काटना नहीं यदि जीना है जीवन तो नियमित करें योग
यह आठ बिंदु है समझाता,कोई लघु राह न बतलाता
तम छटकर तेज प्रसारित हो यह उसी राह का निर्माता
यम नियम और आसन करके यह प्राणायाम बताता है
श्वासों से प्राणपुंज भरने की क्रिया रोज दोहराता है
फिर प्रत्याहार ,ध्यान करके ,धारणा समाधि का प्रयोग
अष्टांग क्रिया से नियमबद्ध ,जीवन शैली हो वही योग
तन स्वस्थ रहे मन पुलकित हो,आभा बिखेरते हों निरोग
नित नियमित करते रहें योग, नित नियमित करते रहें योग